The 2-Minute Rule for Subconscious Mind Power



“नहीं… हम दोनों वहां कभी नहीं गए है.”, ऋतू बोली. शिल्पा को शायद गलत याद था. यादें भी कभी कभी समय के साथ धुंधली हो जाती है.

सुमति का सर दर्द अब और बढ़ता ही जा रहा था. न जाने कितने नयी यादें उसकी आँखों के सामने दौड़ने लगी थी. उसका सर चकरा रहा था. और उस वक़्त उसके हाथों से उसकी साड़ी छुट कर निचे गिर गयी. उसने अपने सर को एक हाथ से पकड़ कर संभालने की कोशिश की. पर सुमति अब खुद को संभाल न सकी और वो बस निचे गिरने ही वाली थी. कि तभी चैतन्य ने दौड़कर उसे सही समय पर पकड़ लिया. सुमति अब चैतन्य की मजबूत बांहों में थी. उसके खुले लम्बे बाल अभी फर्श को छू रहे थे. और सुमति की आँखों के सामने उसके होने वाले पति का चेहरा था. चैतन्य की बड़ी बड़ी आँखें, उसके मोटे डार्क होंठ और हलकी सी दाढ़ी.. सुमति अपने होने वाले पति की बांहों में उसे इतने करीब से देख रही थी. और चैतन्य मुस्कुराते हुए सुमति को बेहद प्यार से सुमति की कमर पर एक हाथ रखे पकडे हुए थे, वहीँ उसका दूसरा हाथ सुमति की पीठ को छू रहा था.

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“आई एम सॉरी सुदीप. मैं गलत थी. क्या हम फिर से साथ हो सकते है?

“Globally we're at this moment of diagnosis on the planet. We've been standing in front of the medical doctor and He's telling us we're coming into the sixth mass extinction.

एक आदमी से शादी करने की सोचते ही उसके मन में खीझ उठती थी. पर उसे ये शादी और बहु होने के किरदार में कम से कम कुछ दिन रहना पड़ेगा जब तक उसे समझ नहीं आ जाता कि ये सब हो क्या रहा है. एक बार माजरा समझ आ जाए तो इस शादी से बाहर निकलने की कोई न कोई तरकीब निकाल लेगी वो.

” (वो साड़ी और ब्लाउज पीस को एक बार फिर देखने लगता है.)

दूसरे दिन मैं ज्यों ही दफ्तर में पहुंचा चोबदार ने आकर कहा-महाराज साहब ने आपको याद किया है।

जो शायद किसी भी नए कपल के लिए सबसे रोमांटिक पल होता, वो पल सुमति के लिए उसके उलट था. एक आदमी की बांहों में उसे बिलकुल अच्छा नहीं लग रहा था. उसने चैतन्य को धक्का देते हुए बोली, “छोडो! जाने दो मुझे!” सुमति का इस वक्त का व्यवहार ठीक नहीं था. आखिर चैतन्य उसकी मदद कर रहा था. पर सुमति भी क्या करती. वो तन से भले इस वक़्त औरत थी पर उसका मन तो वोही पहले वाली सुमति का था. वो कभी किसी आदमी की तरफ आकर्षित नहीं महसूस करती थी भले वो एक औरत की तरह कपडे पहनना पसंद करती थी. सुमति औरत होने के इस पहलु को स्वीकार नहीं कर पा रही थी. और इस वक़्त इस नाजुक तन में चैतन्य के सामने वो कितनी असहाय महसूस कर रही थी. और उसके पास सिर्फ उसकी जुबां थी स्थिति को संभालने के लिए.

उसका इस वक़्त कुछ भी पकाने का मन नहीं था. “रोहित, ज़रा माँ-बाबूजी का ध्यान रखना. मैं किचन में नाश्ता बनाती हूँ. तब तक तुम उन्हें पीने के लिए पानी तो लाकर दो.”, सुमति ने अपने भाई से कहा. और भाई ने सर हिलाकर हामी भर दी.

गोल गप्पे खाने के बाद दोनों फिर वहां से चल पड़ी. मौसम थोडा ठंडा हो रहा था. ऋतू खुद को ठण्ड से बचने के लिए खुद को अपने दुपट्टे में लपेट रही थी. पर उसका पतला सा दुपट्टा उसे ठण्ड check here से बचाने के लिए नाकाफी था. शिल्पा ने ऋतू को देखा और उसे समझ आ गया कि ऋतू को ठण्ड लग रही है. उसने अपनी पर्स से एक शाल निकाली और ऋतू को read more बेहद प्यार से ओढाते हुए बोली, “लो… अब तुम्हे अच्छा लगेगा. मुझे पता था कि तुम ठण्ड के लिए तैयार होकर नहीं आओगी. तुम भी न… वैसी की वैसी हो!” कितनी प्यारी थी शिल्पा. हमेशा से ही तो ऐसी प्यारी थी वो, ऋतू मन ही मन सोचने लगी.

Hypnosis – We could recreate our Theta condition of receptivity and use it to re-application our mind in a far more mindful way. And the cool matter is that each of us have usage of this condition of currently being two moments every single day in which we can effectively ‘hypnotise’ ourselves – just before slipping asleep and equally as we have been waking up.

कम से कम, उसकी नयी यादों में वो सच था. चैतन्य खुद चैताली नाम की लड़की हुआ करता था पर उसे वो बिलकुल भी याद नहीं था. सुमति के अन्दर थोड़ी सी here झिझक थी चैतन्य की मुस्कान का जवाब देने के लिए. आखिर सास ससुर उसके सामने थे. कोई अच्छी बहु ऐसे कर सकती थी भला?

क्योंकि स्त्री-बोध एक ऐसा तोहफा है जिसके लिए हर संघर्ष छोटे है. हम भाग्यशाली है जो भले तन से न सही पर दिल से तो औरत है.

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